Friday, 17 January 2014

खून में जब अंतर नहीं
थो क्यों इंसानो में फर्क हो

सच है भगवन ने इंसानो में कोई अंतर नहीं किया है, ये थो हम ही  है जो धर्म क नाम पर एक दूसरे से दूर है आज भी, भगवन ने थो इंसान बनाया पर हम इंसानो ने धर्म बनाया। 

आज एक टीवी पर एक इश्तिहार चल रहा था खून दान करने का पुण्य और उसका लाब कितना होता है बता रहे थे।  एक छोटी सी बची सबको शुकिया बोल रही थी, ताकि उसका थैंक्स उस इंसान तक पूछे जिसके खून से वो अभी तक ज़िंदा है। 

उस इस्तिहार से ऐसा लगा कि जब भगवन ने हमे खून से भी अलग नहीं किया है थो हम क्यों अलग करते है एक दूसरे को जात और धर्म क नाम पे। भगवन ने थोड़ी हिन्दू का खून लाल बनाया और मिस्लिम का हरा , सबका लाल ही है। 

खून का दान करते समय हम नहीं जानते कि ये किस्से दिया जायेगा, किस्से इसकी जरुरत पड़ेगी और ना ही उस  इंसान को पता चलता है कि उससे किस का खून चढ़ाया जाता है। क्या कभी जिसका एक्सीडेंट हुआ उसने उठ कर डॉक्टर को पूछा है कि ये किस का खून है, या फिर उसके परिवार ने पूछा है कि ये किस का खून है? नहीं उस वक़्त थो जिसने खून दान किया है उसको सुब जन दुआ देते है।  

हॉस्पिटल में थोड़ी हर बोतल में खून क साथ धर्म का टैग लगाया जात है, वह थो सिर्फ खून को ब्लड ग्रुप क हिसाब से रखते है, थो फिर क्यों आज भी धर्म क नाम पर हम एक दूसरे को अलग अलग मानते है। 

जब उस भगवन ने भी हमे अलग नहीं माना थो फिर हम क्यों अलग मने एक दूसरे को। हम सुब एक है, उस एक मालिक के बन्दे, उस भगवन के बचे है। 

जिस तरह भगवन एक है बस रूप अलग अलग है,
उसी तरह
हम एक है बस रूप अलग अलग है। 

रघुपति राघव राजाराम,
पतित पावन सीताराम
सीताराम सीताराम,
भज प्यारे तू सीताराम
ईश्वर अल्लाह तेरो नाम,
सब को सन्मति दे भगवान
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